प्राधिकरण ने मृतक की गलती मानते हुए क्षतिपूर्ति की राशि कम कर दी थी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कुल पांच बिंदुओं पर विचार किया। याची की तरफ से तर्क दिया गया कि प्राधिकरण ने गवाहों के बयानों पर ध्यान नहीं दिया और घटना में मृतक की भी गलती मानते हुए क्षतिपूर्ति की राशि को कम कर दिया। इसके साथ ही एफआईआर और पुलिस रिकार्ड को भी नजरअंदाज किया गया। मासिक आय केदस्तावेजों को साक्ष्य न मानकर गलती की है। प्रतिवादी के अधिवक्ता ने कहा कि प्राधिकरण ने गवाहों के बयानों पर भरोसा न करके कोई गलती नहीं की है।
याची की ओर से मृतक का उपचार किस हॉस्पिटल में हुआ इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। इसके अलावा आरोपपत्र पर गवाहों के नाम उल्लिखित नहीं हैं, जिसके कारण घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति संदेहास्पद है। लेकिन, कोर्ट ने प्रतिवादी के तर्कों को नहीं माना और कहा कि घटना में मृतक की कोई गलती नहीं थी। दुर्घटना ट्रक ड्राइवर की लापरवाही के कारण हुई है। अत: प्राधिकारण ने क्षतिपूर्ति की जो राशि अवार्ड की, वह समुचित नहीं है। लिहाजा, कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की दो लाख, 30 हजार, 400 रुपये की धनराशि को बढ़ाकर 33 लाख, 50 हजार रुपये कर दी ।