निचली अदालत द्वारा आरोपी को किशोर घोषित करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याची ने कहा कि आरोपी की जन्मतिथि शैक्षिक प्रमाणपत्र के कम कर लिखाई गई है। वास्तव में वह बालिग है। अस्थि जांच करवा कर आरोपी की वास्तविक आयु का पता लगाया जाना जरूरी है।
कोर्ट ने आयु निर्धारण के लिए बाल अपचारी के अस्थि जांच की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 का हवाला देते हुए कहा कि शैक्षिक प्रमाणपत्र मौजूद है तो आयु निर्धारण के लिए उसे ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में न अस्थि जांच की जरूरत है और न जांच का आदेश दिया जा सकता है।