जिला अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर कराई डीएनए जांच से पांच साल पहले हुई युवक की हत्या की गुत्थी सुलझा दी। कोर्ट ने हत्यारोपी इरशाद को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और ढाई हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही डीजीपी को लापरवाह विवेचक सेवानिवृत्त अरुण कुमार त्यागी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
यह फैसला एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डॉ.दिनेश चंद्र शुक्ला की अदालत ने पांच साल तक चले ट्रायल को निस्तारित करते हुए सुनाया है। मामला प्रयागराज के कर्नलगंज का है। सादियाबाद मोहल्ले के अमिर की लाश आईईआरटी के पास मिली थी। आमिर की मां महजबी बानो ने एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया कि 15 मार्च की रात 10 बजे उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया।
आमिर मां को थोड़ी देर में लौटने की बात कह कर घर से पैदल निकला था।
थोड़ी देर में परिजनों की सूचना मिली कि आमिर की लाश पानी की टंकी के पास मिली है। मृतक के नाखून में खून व बाल उलझे मिले थे। विवेचना के दौरान पता लगा कि बीसी के पैसे के लेनदेन को लेकर आमिर और इरशाद के बीच विवाद चल रहा था। इरशाद की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
पांच साल चले ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल सुशील वैश्य ने 10 व बचाव पक्ष ने चार गवाह पेश किए। इसी दौरान कोर्ट ने यह भी पाया कि मौके से बरामद मृतक के नाखून व खून में उलझे बाल का विवेचक ने संकलन किया। लेकिन, फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर बालों का डीएनए टेस्ट कराया। जांच में बालों का डीएनए इरशाद से मेल खाया। कोर्ट ने इरशाद को हत्या का दोषी करार दे उसे आजीवन कारावास व ढाई हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई दी।