एसपी ने व्यक्तिगत हलफनामा दिया कि बीएनएसएस के शुरू होने के बाद पुलिस तकनीकी सेवा मुख्यालय उप्र की ओर से परिपत्र जारी किया गया था। इसके अनुसार यदि बीएनएस के लागू होने से पहले कोई अपराध किया जाता है तो एफआईआर आईपीसी के प्रावधानों में दर्ज की जाएगी। लेकिन, बीएनएसएस के अनुसार जांच की प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। संबंधित मामले में घटना एक जुलाई 2024 से पहले हुई थी। इसलिए आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
कोर्ट ने कहा कि एक जुलाई 2024 को लंबित जांच में पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लिए जाने तक सीआरपीसी के अनुसार जांच जारी रहेगी। यदि सक्षम न्यायालय की ओर से आगे की जांच के लिए कोई निर्देश दिया जाता है तो वह भी सीआरपीसी के अनुसार जांच की जाएगी। साथ ही एक जुलाई 2024 को या उसके बाद लंबित जांच का संज्ञान बीएनएसएस के अनुसार लिया जाएगा। साथ ही जांच, परीक्षण या अपील सहित सभी बाद की कार्यवाही बीएनएसएस की प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
यदि आपराधिक कार्यवाही या आरोप पत्र को एक जुलाई 2024 को या उसके बाद हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी जाती है तो उसे बीएनएसएस की धारा 528 के तहत दायर किया जाएगा। वहीं, कोर्ट ने कहा कि याचिका में एफआईआर को रद्द करने की प्रार्थना की गई है, लेकिन इस पर जोर नहीं दिया गया है। न्यायालय ने अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य और सामाजिक कार्य मंच मानव अधिकार बनाम भारत संघ तथा सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो और अन्य के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के मद्देनजर याचिका का निपटारा कर दिया।