इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के 12 वर्षीय बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी अफसर की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के 12 वर्षीय बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी अफसर की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी।
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मामला रामपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के मुताबिक 25 मार्च 2015 को आरोपी अफसर ने 12 वर्षीय बच्चे को बहला-फुसलाकर बैटरी चालित रिक्शे पर बैठाया। इसके बाद वह उसे शाहाबाद गेट के पास एक खेत में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया। मामले में चले ट्रायल के बाद रामपुर की पॉक्सो की विशेष अदालत ने 15 मई 2023 को आरोपी को दोषी करार देते हुए, सात साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।
इसके खिलाफ अफसर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने पाया कि पीड़ित के बयान और ट्रायल के दौरान सामने आए साक्ष्यों में कोई विरोधाभास नहीं था। लिहाजा, ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है। कोर्ट ने जेल अपील खारिज करते हुए कहा कि अपीलार्थी पहले ही करीब सात साल जेल में बिता चुका है। लिहाजा, जेल में बताई गई अवधि उसकी सजा में समायोजित कर दी जाएं।