इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिहायशी इलाकों में शोर मचाती आटा चक्की के संचालन पर रोक के मुरादाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर मुहर लगा दी। कहा कि ध्वनि प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिहायशी इलाकों में शोर मचाती आटा चक्की के संचालन पर रोक के मुरादाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर मुहर लगा दी। कहा कि ध्वनि प्रदूषण के मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह जनहित में किसी भी शोर करने वाली या प्रदूषण फैलाने वाली इकाई को बंद करा सकता है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने इमरान सिद्दीकी की याचिका पर दिया है। मामला मुरादाबाद के नागफनी थाना क्षेत्र का है। सिटी मजिस्ट्रेट ने पड़ोसियों की शिकायत पर घनी आबादी में याची की संचालित आटा चक्की को बंद करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ याची पहले सत्र न्यायालय गया और फिर हाईकोर्ट की शरण ली। याची ने कोर्ट से मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए आटा चक्की शांतिपूर्ण ढंग से चलाने की अनुमति मांगी।
कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में पाया कि टीम ने जिस आवासीय इलाके में शोर का मानक 55 डेसिबल होना चाहिए, वहां चक्की बंद होने पर भी शोर 60.7 डेसिबल था और चक्की चलने पर यह 66 डेसिबल तक पहुंच रहा था। सुनवाई के दौरान याची ने आश्वासन दिया कि वह अपनी चक्की आबादी से बाहर स्थानांतरित कर लेगा।