हाईकोर्ट ने रद्द कर दी उम्रकैद की सजा
मामले में सत्र न्यायालय ने इरफान, शान इलाही व चांद मियां को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला हाईकोर्ट में आने पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर में किसी भी आरोपी का हुलिया या पहचान संबंधी विवरण नहीं दिया गया है। जबकि, गवाहों ने घटना को करीब से देखने का दावा किया है। मृत्यु कालिक कथन और एफआईआर में घटना के तरीके में भी अंतर है। पहचान परेड घटना के दो महीने बाद कराई गई। वीसीआर की बरामदगी जिन गवाहों के सामने दिखाई गई, वे मृतक के रिश्तेदार और परिचित थे। इसलिए बरामदगी भी संदेहास्पद है।
वहीं, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी थी कि युवक को गंभीर चोटें आई थीं और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान से यह सिद्ध होता है कि उस पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। आरोपियों की पहचान परेड कराई गई थी। वीसीआर भी बरामद हुआ था। इसलिए सत्र न्यायालय का फैसला सही है। कोर्ट ने इरफान और शान इलाही की दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी। तीसरे आरोपी चांद मियां की अपील उसके निधन के कारण समाप्त हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपी जमानत पर हैं। इसलिए उन्हें आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है और उनके जमानत बंधपत्र भी निरस्त किए जाते हैं। ब्यूरो