अदालत के आदेश का पालन करना अधिकारियों का कर्तव्य है। मामला जौनपुर के सुजानगंज थानाक्षेत्र के बरजूकला गांव का है। याची अशोक ने 16 साल पहले निजी प्रतिवादियों की ओर से उनकी संपत्ति में हस्तक्षेप के खिलाफ सिविल जज की अदालत में वाद दाखिल किया था।
अदालती आदेश के अनुपालन में अधिकारियों की बेपरवाही चरम पर है। हालात यह हैं कि अवमानना की कार्यवाही के बगैर ये आदेश के अनुपालन में अंगुली तक नहीं हिलाते। वादकारी न्याय के लिए भिखारी की तरह दर-दर भटकने को मजबूर होते हैं। यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति शेखर बी शराफ और न्यायमूर्ति विपिन चंद्र दीक्षित की खंडपीठ ने अशोक की याचिका पर की। कहा, जनता को अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाने व न्याय की भीख मांगने की जरूरत नहीं है।
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अदालत के आदेश का पालन करना अधिकारियों का कर्तव्य है। मामला जौनपुर के सुजानगंज थानाक्षेत्र के बरजूकला गांव का है। याची अशोक ने 16 साल पहले निजी प्रतिवादियों की ओर से उनकी संपत्ति में हस्तक्षेप के खिलाफ सिविल जज की अदालत में वाद दाखिल किया था। अदालत ने याची के पक्ष में निषेधाज्ञा आदेश पारित कर प्रतिवादियों के हस्तक्षेप पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी प्रतिवादी प्रश्नगत संपत्ति मेें हस्तक्षेप करने से बाज नहीं आए।
इसके खिलाफ याची ने निषेधाज्ञा आदेश का हवाला देते हुए जौनपुर पुलिस और डीएम से शिकायत की, लेकिन वहां भी सुनवाई नहीं हुई। मजबूरन याची को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। याची के अधिवक्ता श्याम शंकर मिश्रा ने दलील दी कि अधिकारियों की ओर से अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा। याची न्याय को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी संग पुलिस अधीक्षक जौनपुर को याची के पक्ष में दिए गए सिविल कोर्ट के 16 सितंबर 2008 के आदेश का अनुपालन करने का आदेश दिया है।