हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत अधिकारियों के 3587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से 21 सितंबर तक जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि भर्ती प्रक्रिया किस नियमावली के तहत की जा रही है। आजमगढ़ के अभिषेक कुमार सिंह ने भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ याचिका दाखिल कर इसे चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल सुनवाई कर रहे हैं। याची का कहना है कि 18 जून 2015 को 3587 ग्राम पंचायत अधिकारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया।
भर्ती की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पंचायत सेवा नियमावली 1978 के तहत की जा रही है। जबकि राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत अधिकारियों की भर्ती के लिए पंचायत विकास अधिकारी भर्ती नियमावली 1999 तैयार की है। नई भर्तियां इसी नियमावली के तहत कराई जानी चाहिए थीं। इससे पूर्व भी 2013 में ग्राम पंचायत अधिकारियों की भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है, जिस पर कोर्ट ने स्थगन आदेश पारित किया है।
राज्य सरकार से इस मामले में भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को सुनवाई के लिए एक साथ संबद्ध कर दिया है। याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश नारायण शर्मा का कहना था कि ग्राम पंचायत अधिकारियों का भर्ती प्राधिकारी ग्राम प्रधान होता है। ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर उसी गांव के शिक्षित बेरोजगारों से आवेदन प्राप्त कर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्राप्तांकों के आधार पर मेरिट तैयार की जानी चाहिए और सर्वाधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी का चयन होना चाहिए। सरकार ने यह प्रक्रिया न अपना कर भर्तियों का जिम्मा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को दे दिया। इससे भर्तियों में व्यापक धांधली होने की संभावना है। कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तिथि नियत की है।