हाईकोर्ट ने जेपी नगर अमरोहा के तीन वकीलों को अवमानना के मामले में सजा सुनाते हुए उनके तीन माह तक कचहरी परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने दो वकीलों को तीन-तीन माह की कैद और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है जबकि तीसरे वकील अमरोहा बार एसोसिएशन पूर्व महासचिव को चार माह की कैद और डेढ़ हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। सजा का आदेश सुनाते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति बीके श्रीवास्तव की पीठ ने अभियुक्तों की मांग पर सजा के अमल पर दो माह की रोक भी लगाई है ताकि वह फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल कर सकें।
प्रकरण के अनुसार जेपी नगर जिला न्यायालय में छह मार्च 2010 को पुराने भवन से पत्रावालियां नवनिर्मित भवन में ले जाई जा रही थी इस दौरान वकीलों के गुट ने इसका विरोध करते हुए हंगामा किया। इसी में से अधिवक्ता सोमपाल सिंह, हेम सिंह आर्या और बार के महासचिव सीएस गोयल ने नए भवन में निर्मित अधिवक्ता चैंबरों पर कब्जे का भी प्रयास किया। उन्होंने बिना जिला की इजाजत और औपचारिक एलाटमेंट के चैंबरों का उद्घाटन समारोह आयोजित कर लिया। बाहर से राजनीतिक लोगों को भी बुलाया गया और उत्तेजक भाषण दिए गए। जिला जज की रिपोर्ट पर जेपी नगर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने तीनों अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने के लिए मामला पांच अक्तूबर 2010 को मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित किया था।
चीफ जस्टिस के आदेश से तीनों के खिलाफ अवमानना का केस चलाया गया। सोमपाल सिंह और हेमसिंह ने अपने बचाव में कहा कि वह लोग अधिवक्ता होने के साथ राजनीतिक दलों से जुडे़ नेता भी हैं। वह बार के सदस्यों के बुलावे पर आए थे और उन्होंने अवमानना का कोई कार्य नहीं किया है। सीएल गोयल ने घटना से इंकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी। कोर्ट ने कहा कि तीनों अवमाननाकारी व्यक्ति वकील हैं और अवमानना संबंधी कानून और अदालत की मर्यादा से बखूबी परिचित हैं। इसके बावजूद इनके द्वारा इस प्रकार का कृत्य किया गया जो अवमानना की श्रेणी में आता है।