हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि इलाहाबाद के धूमनगंज, नैनी, शंकरगढ़ और मेजा थानों में तैनात थाना प्रभारियों की नियुक्ति की समीक्षा करें। यदि ये लोग अधिकतम समय सीमा से अधिक समय से तैनात हैं तो किसी दूसरे थाने में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। आदेश की प्रति एक सप्ताह के भीतर डीजीपी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश अमर उजाला में प्रकाशित समाचार शासनादेशों पर भारी दो प्रभारी के आधार पर राघवेंद्र सिंह द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संजय कौशिक का कहना था कि कई थाना प्रभारी अपने राजनीतिक जुगाड़ के बूते एक-एक दशक से इलाहाबाद में ही जमे हैं। जबकि शासनादेश है कि एक जिले में छह वर्ष से अधिक तैनाती नहीं हो सकती है। मगर इनकी राजनीतिक पहुंच के कारण पुलिस अधिकारी भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। याची ने अमर उजाला में प्रकाशित समाचार का भी हवाला दिया। अदालत को बताया कि नैनी, शंकरगढ़, मेजा और धूमनगंज थानों में तैनात प्रभारी लंबे समय से एक ही जिले में जमे हैं।
खंडपीठ ने याचिका के तथ्यों को देखते हुए डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह याचिका में बताए गए थानों के प्रभारियों की तैनाती की समीक्षा करें। यदि यह प्रभारी अपना अधिकतम कार्यकाल पूरा कर चुके हैं तो उनका स्थानांतरण किसी दूसरे थाने में किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस आदेश की प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए डीजीपी को एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने का स्थायी अधिवक्ता को आदेश दिया हैै।