प्रदेश के हजारों पुलिस सिपाहियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान स्टाइपेंड के बजाए वेतन और भत्ते भुगतान कर देने के मामले हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। कोर्ट ने गलत भुगतान हुए वेतन की रिकवरी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग से छह सप्ताह में जवाब तलब किया है। बृजेश कुमार यादव सहित सैकड़ों पुलिस सिपाहियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पांच फरवरी 2015 को जारी रिकवरी आदेश को चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार सुनवाई कर रहे हैं।
याचीगण का कहना है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2002 से 2008 के बीच हुई है। उनको प्रशिक्षण अवधि में वेतन और भत्ते का जो भुगतान किया गया था उसकी वसूली के लिए पांच फरवरी 2015 को आदेश जारी कर दिया गया। वसूली आदेश जारी करने से पूर्व उनका पक्ष नहीं सुना गया। वेतन और भत्ते का भुगतान याचीगण की मांग या किसी अनुचित प्रत्यावेदन पर नहीं किया गया बल्कि सरकार और विभाग की गलती से किया गया है। इसलिए सरकार की गलती की सजा उनको नहीं दी जा सकती है। वसूली गलत है।
अब उनके वेतन से तीन हजार रुपये प्रतिमाह की वसूली की जा रही है जो बहुत ज्यादा है। याची ने सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह के केस का हवाला देकर कहा कि सरकार की गलती से ज्यादा किया गया भुगतान वसूला नहीं जा सकता है। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता वीपी कछवाह का कहना था कि सुप्रीमकोर्ट के नए निर्णय आ गए है, जिसमें उन्होंने अधिक भुगतान की वसूली को सही माना है। कोर्ट ने फिलहाल वसूली आदेश पर रोक लगाने की प्रार्थना अस्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका पर छह सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।