मामले के अनुसार याची पर एक आश्रम में वर्ष 2011 में एक शिष्या को बंधक बनाकर उसके साथ दुराचार करने का आरोप है। इसके बाद शिष्या और उसके परिवार वालों ने शाहजहांपुर के कोतवाली थाने में आईपीसी की धारा 307, 313, 342, 323, 376 व 506 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जिसमें बाद में धारा 376 व 506 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया।
राज्य सरकार ने नौ मार्च 2018 को चिन्मयानंद के खिलाफ दर्ज दुराचार के केस को वापस लेने का आदेश जारी किया था। सरकार के मुकदमा वापसी का आदेश शाहजहांपुर की अदालत में दाखिल किया गया। शाहजहांपुर की अदालत ने सुनवाई के बाद मुकदमा वापसी के फैसले को गलत माना था। निचली अदालत के इस फैसले को वर्ष 2018 में ही चुनौती दी गई थी।
स्वामी चिन्मयानंद की ओर से 75 साल की उम्र होने और कई गंभीर बीमारियां होने के आधार पर राहत की अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।इसके साथ ही स्वामी चिन्मयानंद को 30 अक्तूबर तक शाहजहांपुर की अदालत में हाजिर को कहा और निचली अदालत के मुताबिक ही चिन्मयानंद की जमानत अर्जी पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद स्वामी चिन्मयानंद की ओर से शाहजहांपुर की अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दी गई, जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया।जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।