मोतियाबिंद के ऑपरेशन में डॉक्टर को लापरवाही भारी पड़ गई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इलाज में चिकित्सकीय लापरवाही का दोषी मानते हुए उसे पीड़ित को दो लाख रुपये मुआवजा आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम और सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की पीठ ने सुधीर कुमार सिंह की ओर से दायर परिवाद पर दिया है।
प्रतापगढ़ निवासी याची सुधीर कुमार सिंह ने आयोग को बताया कि आंखों से कम दिखने पर अगस्त-2011 में प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में उपचार कराया। डॉक्टर की सलाह पर 26 अगस्त 2011 को बाईं आंख में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने के बाद लेंस डाला गया। इसके बावजूद आंख की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। लगातार दर्द, संक्रमण और रोशनी कम होने की शिकायत पर डॉक्टर लंबे समय तक सिर्फ दवाओं से इलाज करता रहा। इस तरह करीब आठ महीने तक इलाज के बावजूद स्थिति बिगड़ती चली गई।
पीड़ित के वकील ने दलील दी कि आंख की रोशनी लगभग समाप्त सी हो जाने पर याची को मजबूरी में दिल्ली जाकर इलाज कराना पड़ा। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि आंख में लगाया गया लेंस गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण से प्रभावित है। इसके बाद दोबारा ऑपरेशन कर संक्रमित लेंस को निकालना पड़ा। संक्रमण का समय रहते सही इलाज न किया जाना और लेंस न हटाया जाना चिकित्सकीय लापरवाही है। याची की बाईं आंख की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो गई और दाहिनी का भी ऑपरेशन कराना पड़ा। आयोग ने आदेश दिया कि डॉक्टर दो माह में याची को दो लाख रुपये मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में आठ प्रतिशत साधारण ब्याज सहित अदा करे। साथ ही याची को वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
डॉक्टर की दलील
डॉक्टर की ओर से दलील दी गई कि यह आरोप गलत है कि आंख में लगाया गया लेंस संक्रमित था। ऑपरेशन के समय व उसके बाद किसी भी परीक्षण में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए। यह कहना गलत है कि दिल्ली स्थित किसी अस्पताल की ओर से लेंस को संक्रमित बताया गया हो। इस संबंध में कोई प्रमाणिक चिकित्सकीय रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।