ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट में उपस्थित होकर प्रयागराज के नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त ने अपना हलफनामा दाखिल किया, जिसे रिकॉर्ड पर ले लिया गया। इस दौरान बिना शर्त अधिकारियों ने माफी मांगी। नगर आयुक्त के ध्वस्तीकरण आदेश को महापौर के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त के स्थगित करने पर हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया था। रंजन केसरवानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नीरज तिवारी, न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को व्यक्तिगत हलफनामे संग पेश होने का आदेश दिया था। पूछा था नगर आयुक्त की ओर से पारित आदेश को अपर नगर आयुक्त किस प्रकार स्थगित कर सकते हैं।
अपर नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि चार जुलाई 2023 को जारी पत्र को दिन समाप्ति तक वापस ले लिया जाएगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि निजी प्रतिवादियों और उनके सहयोगियों के विरोध के कारण याचिकाकर्ता संबंधित मकान को स्वयं ध्वस्त कराने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में अदालत से अनुरोध किया कि प्राधिकरण को ही उक्त मकान ध्वस्त करने का निर्देश दिया जाए।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी दोपहर दो बजे होगी। साथ ही निर्देश दिया है कि प्रतिवादी अगली तिथि पर यह बताते हुए हलफनामा दाखिल करेगा कि मकान ध्वस्तीकरण में अनुमानित खर्च कितना आएगा। इसके अलावा चार जुलाई 2023 के पत्र को वापस लेने संबंधी आदेश भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाएगा। अदालत ने नगर आयुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति को अगले आदेश तक छूट दे दी है, लेकिन अपर नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।