कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम अलापन बंद्योपाध्याय और एल चंद्र कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए याची की दलीलें खारिज कर दीं। स्पष्ट किया कि अनुच्छेद-226(2) के तहत केवल तथ्यों के समूह के आधार पर अधिकार क्षेत्र तय नहीं होगा। किसी भी न्यायाधिकरण के फैसले की समीक्षा वही हाईकोर्ट करेगा, जिसके भौगोलिक क्षेत्र में वह न्यायाधिकरण स्थित है।
टिप्पणी
यदि अलग-अलग राज्यों के निवासी एक ही केंद्रीय आदेश को अपने-अपने राज्यों के हाईकोर्ट में चुनौती देंगे तो इससे कानूनी अनिश्चितता और परस्पर विरोधी निर्णयों की स्थिति पैदा होगी। इससे बचने के लिए एक न्यायाधिकरण, एक उच्च न्यायालय का पालन अनिवार्य है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट
एकपक्षीय फैसले के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका पोषणीय नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामल में परिवार न्यायालय के एकपक्षीय आदेश के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका को पोषणीय नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि प्रभावित पक्ष को सबसे पहले उसी अदालत में जाना होगा, जिसने आदेश पारित किया है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की एकल पीठ ने देवरिया के अभिषेक की ओर से पत्नी और बच्चों के पक्ष में परिवार न्यायालय के दिए एकपक्षीय फैसले के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। हालांकि, याची को संबंधित न्यायालय में उचित आवेदन देने की स्वतंत्रता प्रदान की है।