बयान पर आंख मूंदकर नहीं किया जा सकता भरोसा
उसने अपने साथ सामूहिक बलात्कार में सभी तीन नामित व्यक्तियों (सगे भाइयों) की पहचान की। महत्वपूर्ण बात यह है कि अपीलकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता और उसकी मां को इस प्रकार की एफआईआर करने की आदत है। कोर्ट ने देखा कि पीड़िता ने खुद की चिकित्सकीय जांच कराने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट रूप से कहा है कि स्वतंत्र दस्तावेजी सबूत या अन्य विश्वास पैदा करने वाली सामग्री के बिना सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के तहत पीड़ितों द्वारा दिए गए बयान पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। पीठ ने कहा कि यह संभव नहीं कि तीन सगे भाई एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार करें। कोर्ट ने अपील की अनुमति देते हुए याची की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।