इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह में सप्तपदी, कन्यादान, पाणिग्रहण, सिंदूर, मंत्रोच्चार आदि संस्कारों का पालन किया गया है तो वह वैध माना जाएगा। विवाह स्थल चाहे आर्य समाज मंदिर हो या फिर घर। उसकी वैधता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सात फेरों संग मांग में सिंदूर भरे जाने की रस्म के साथ वैध हिंदू विवाह की रस्में पूरी हो जाती हैं। यह रस्म घर में पूरी हों आर्य समाज मंदिर में, अपराधिक मुकदमें से मुक्ति के लिए सात जन्मों के इस बंधन को नकारा नहीं जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने आर्य समाज में हुई शादी को अवैध बता दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को रद्द कराने पहुंचे बरेली निवासी पति महाराज सिंह की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि हिन्दू विवाह समझौता नहीं संस्कार है। यहां रीति-रिवाज और रस्में ही कानून है। इसे न मानना गैरकानूनी हो सकता है, लेकिन यह रिश्ता नहीं। हिंदू विधि के मुताबिक विवाह के लिए सप्तपदी, कन्यादान, मांग भराई जैसी रस्में किसी प्रमाण पत्र की मोहताज नहीं है। या रस्में घर में पूरी हो या मंदिर में या फिर जंगल में, इसे नकारा नहीं जा सकता।
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बरेली निवासी याची पर उसकी पत्नी ने हाफिजगंज थाने में दहेज उत्पीड़न और अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने एसीजेएम की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की नजीर पेश करते दलील दी कि आर्य समाज मंदिर में हुए विवाह वैध नहीं हैं। आर्य समाज की ओर से जारी प्रमाणपत्र जाली और मनगढ़ंत हैं। वहीं अपर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि विवाह हिंदू रीति-रिवाजों और संस्कारों के अनुसार किया गया है। पुरोहित ने भी इसकी पुष्टि की है। आर्य समाज मंदिर में विवाह होने से यह अमान्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पीड़िता के बयान और पुरोहित की गवाही को पर्याप्त माना। मुकदमे की कार्रवाई को रद्द करने से इन्कार कर दिया।
शादी का पंजीकरण नहीं है तब भी वैध विवाह अमान्य नहीं होगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीकरण नियम-2017 के अनुसार, विवाह का पंजीकरण नहीं हुआ है। तब भी वैध विवाह अमान्य नहीं होगा। यह भी कहा कि आर्य समाज मंदिर की ओर से जारी प्रमाणपत्र बेकार कागज नहीं है। इसे साक्ष्य अधिनियम के आधार पर साबित किया जा सकता है।