इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर जिले के मदरसा अरबीया शम्सुल उलूम सिकरीगंज की ओर से जारी उर्दू शिक्षक के पांच व लिपिक के एक पद के भर्ती विज्ञापन को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार मदरसों में शिक्षकों की योग्यता और चयन प्रक्रिया से जुड़ी नई नीतियां तय नहीं कर देती, तब तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने मदरसा अरबीया शम्सुल उलूम सिकरीगंज की ओर से दाखिल याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मदरसा चलाने वाली सोसायटी में प्रबंध तंत्र को लेकर विवाद लंबित है। बावजूद इसके, खुद को प्रबंधक बताते हुए सज्जाद हुसैन ने 29 अप्रैल 2025 को पांच सहायक अध्यापकों और एक क्लर्क की भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया। यह विज्ञापन उस समय जारी हुआ जब राज्य सरकार ने 20 मई 2025 को स्पष्ट आदेश जारी किया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से कामिल और फाजिल डिग्रियों को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद नई योग्यता तय होने तक मदरसों में कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षकों की योग्यता पर पुनर्विचार का निर्देश दिया है और राज्य सरकार ने इस संबंध में नई नीति बनने तक नियुक्तियों पर रोक लगाई है, तब किसी भी संस्था को इस आदेश की अवहेलना का अधिकार नहीं है।