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High Court : वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं

Wed, 29 Apr 2026 12:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सहमति से बने लंबे समय के शारीरिक संबंधों को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सहमति से बने लंबे समय के शारीरिक संबंधों को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने मामले के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि पीड़िता और आरोपी के बीच के संबंध प्रथम दृष्टया सहमति पर आधारित प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में दायर अग्रिम जमानत अर्जी सशर्त स्वीकार कर ली। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की पीठ ने बंसराज यादव की अर्जी पर दिया है।

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आजमगढ़ के सिधारी थाने में याची पर पीड़िता ने दुष्कर्म व अन्य आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दायर की। पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि पीड़िता 35 वर्षीय विधवा है। उसने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह वर्ष 2022 से आरोपी के साथ फोन पर बातचीत कर रही थी। उनके बीच संबंध थे।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि एफआईआर में आरोपी पर डरा-धमकाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया, लेकिन पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान और मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टर को दी गई जानकारी अलग ही कहानी बयां करती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एफआईआर और बीएनएसएस की धारा 183 के बयानों में विरोधाभास अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करता है।

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