हाईकोर्ट ने बांदा के बबेरू थाने के अंतर्गत छह अक्तूबर 2003 को हुई हत्या के मामले में अभियुक्तों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने आर्म्स एक्ट के तहत सुनाई गई सजा से अभियुक्तों को राहत दे दी है। यह आदेश मकरंद सिंह व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश त्रिपाठी की दो जजों की खंडपीठ ने दिया है।
मकरंद सिंह, रामजीत, रामकप्तान और ऋषिकेश पर धारा आईपीसी की धारा 302/34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25/27 के अंतर्गत गोली मारकर हत्या करने के आरोप में बांदा जिले के बबेरू थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले में निचली अदालत ने 27 जुलाई 2006 को तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जबकि एक अभियुक्त को आर्म्स एक्ट के तहत सजा का आदेश दिया था।
अभियुक्तों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने तमाम तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए निचली अदालत के फैसले को सही पाते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है, जबकि अभियुक्तों को आर्म्स एक्ट की धाराओं का दोषी नहीं पाया।