इलाहाबाद हाईकोर्ट के विभाजन की कवायद के विरोध में हाईकोर्ट के वकीलों के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। सोमवार को वकील हाईकोर्ट से निकले और पैदल कचहरी तक पहुंचे। सुभाष चौराहे पर उन्होंने चार भाजपा नेताओं का पुतला फूंका। कचहरी पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। ज्ञापन में वह तमाम दलीलें दी गई हैं, जिनके अनुसार नई बेंच बनाना न न्याय के हित मेें है और न ही जनता के हित में। हाईकोर्ट के वकीलों का साथ देने के लिए कचहरी, कैट, राजस्व परिषद, डीआरटी और अन्य अधिवक्ता संगठनों के अलावा कई व्यापारी, राजनीतिक और सामाजिक संगठन भी साथ आए।
पहले से तय कार्यक्रम के तहत हाईकोर्ट के सामने सुबह दस बजे ही हजारों अधिवक्ता एकत्रित हो गए। 11 बजे दिन में अध्यक्ष राकेश पांडेय की अगुवाई में पद यात्रा प्रारंभ हुई और पत्थर गिरजाघर से होते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, तुलसी पार्क चौराहा और म्योहाल होते हुए कचहरी पहुंची। कचहरी पर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र और मंत्री देवेंद्र नगरहा के साथ सैकड़ों अधिवक्ता जुलूस में शामिल हो गए। चौरासी खंभा पर एक जनसभा आयोजित की गई। वकीलों ने एक स्वर में बेंच विभाजन का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक स्वार्थवश उठाया गया कदम बताया। कांग्रेस के विधायक अनुग्रह नारायण सिंह और मुकुंद तिवारी ने भी जनसभा को संबोधित किया।
डीएम भवनाथ और एसएसपी दीपक कुमार ने जनसभा स्थल पहुंचकर वकीलों से ज्ञापन लिया। ज्ञापन में बेंच विभाजन संबंधी भाजपा नेताओं के बयान की भर्त्सना की गई है। प्रधानमंत्री से इस बयानबाजी को रोकने की मांग की गई है। यह भी बताया गया है कि बेंच का विभाजन किस प्रकार से असंवैधानिक और जनहित विरोधी है। महासचिव सीपी उपाध्याय ने कहा कि दिल्ली की लॉ फर्में बेंच विभाजन चाहती हैं। राकेश पांडेय ने बताया कि 23 दिसंबर मंगलवार को वकील पूरे शहर में वाहन जुलूस निकालेंगे।
हाईकोर्ट विभाजन के विरोध में सोमवार को चौरासी खंभा कचहरी पर आयोजित जनसभा में हाईकोर्ट और कचहरी के वकील जमकर गरजे। सब ने कसम खाई कि किसी भी कीमत पर हाईकोर्ट का विभाजन नहीं होने देंगे क्यों यह इलाहाबाद की अस्मिता से जुड़ा मामला है। संगम और हाईकोर्ट इस शहर की पहचान है। मामला न्यायपालिका की अखंडता और गरिमा का भी है। सभा में मौजूद प्रमुख लोगों में एबीएल गौड़, अनुग्रह नारायण सिंह, बीके श्रीवास्तव, यूएन शर्मा, ब्रजेश सहाय, ओपी सिंह, दयाशंकर मिश्र, अनिल तिवारी, नरेश चंद्र त्रिपाठी, वीर सिंह, केके द्विवेदी, डीके श्रीवास्तव, पीसी श्रीवास्तव, पीके तिवारी, शैलेंद्र द्विवेदी, वीएस सिंह पुजारी, जेए आजमी, अवधेश श्रीवास्तव, विवेक मिश्र, वेणु गोपाल, राजेश कुमार, शिव सिंह यादव, एलडी राजभर, सुनीता जैन, एके ओझा, संजय कुमार त्रिपाठी, सुरेंद्र नाथ मिश्र, अतुल पांडेय, संतोष कुमार मिश्र, अभिषेक सिंह चौहान, राहुल कुमार पांडेय के अलावा जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष व मंत्री के अलावा उमाशंकर मिवारी, राके श तिवारी, नंद किशोर त्रिपाठी, इरशाद अहमद अंसारी, सुधाकर पांडेय, कुश कुमार पांडेय, रेवती रमण त्रिपाठी, केबी सिंह सहित सैकड़ों अधिवक्ता शामिल थे।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट के वकीलों का समर्थन किया है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति का कहना है कि अधिवक्ताओं ने छात्रों की लड़ाई में साथ दिया है और आयोग के खिलाफ न्यायालय में निशुल्क सेवा दी है। इसलिए प्रतियोगी छात्र भी उनकी हर स्तर पर मदद करेंगे। प्रतियोगी छात्रों के वकील संतोष कुमार श्रीवास्तव, अवनीश कुमार पांडेय, राणा यशवंत, उत्पल पराशर, चंदन सिंह, अनिल सिंह आदि ने समर्थन दिया है।