फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : किराये के मकान में दुर्घटनावश मौत पर मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते, आपराधिक कार्रवाई रद्द

Wed, 09 Sep 2026 11:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किराये के मकान में दुर्घटनावश मौत पर मालिक को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए अभियोजन को मकान मालिक की ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथमदृष्टया साक्ष्य देना होगा।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किराये के मकान में दुर्घटनावश मौत पर मालिक को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए अभियोजन को मकान मालिक की ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथमदृष्टया साक्ष्य देना होगा, जिसका मौत से सीधा और निकट संबंध हो। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने छात्र की मौत के मामले में याची मकान मालिक अवधेश सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

विज्ञापन


कानपुर नगर के काकादेव थाने में याची के खिलाफ परिजनों ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि छात्र आठ महीने से याची के मकान में किराये पर रहकर आईआईटी की तैयारी कर रहा था। एक दिसंबर 2025 को उन्हें छात्र की मौत की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर छात्र का शव मकान के बाथरूम में मिला था। 

आरोप...बाथरूम में गैस गीजर लगा था, पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था

एफआईआर में आरोप लगाया गया कि बाथरूम में गैस गीजर लगा था और पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था। ऐसे में आशंका जताई गई कि गीजर से निकली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण छात्र की मौत हुई। जांच के बाद पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ लापरवाही से मौत मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी। ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान/समन आदेश जारी किया तो याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
विज्ञापन


सिर्फ अंदाजे पर आपराधिक केस नहीं चल सकता

कोर्ट ने कहा कि छात्र की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन मकान में केवल मौत होने से बीएनएस की धारा-106 के तहत मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि गीजर सुरक्षा मानकों के खिलाफ लगाया गया था, वह खराब था। इसकी जानकारी मकान मालिक को थी या पहले कभी लीकेज की शिकायत के बाद भी उसने ठीक नहीं कराया। केवल अंदाजे पर आपराधिक केस नहीं चल सकता। ऐसे में कोर्ट ने आपराधिक की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें