जस्टिस शेखर कुमार यादव इलाहाबाद हाईकोर्ट के पहले जज हैं, जिनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव आया है। इनसे पहले देश में चार अन्य जजों के खिलाफ महाभियोग लाया जा चुका है, पर हटाने की प्रक्रिया किसी में भी पूरी नहीं हो पाई। विश्व हिंदू परिषद की ओर से हाईकोर्ट परिसर स्थित बार एसोसिएशन के सभागार में जस्टिस यादव की कथित विवादास्पद टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट तलब कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सांसद कपिल सिब्बल उनके विरुद्ध महाभियोग भी लाए हैं। राज्यसभा के 55 सदस्यों के हस्ताक्षर से नोटिस भी दिया जा चुका है। जस्टिस यादव के समर्थन और विरोध में पूर्व जज और अधिवक्ता समूह लामबंद हो रहे हैं।
देश में पंजाब-हरियाणा के न्यायमूर्ति वी.रामास्वामी, सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरन, कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौमित्र सेन, गुजरात हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आया, लेकिन पारित नहीं हो सका। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसके गंगेल व आंध्र प्रदेश-तेलंगाना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सीवी नागार्जुन रेड्डी के खिलाफ भी महाभियोग प्रस्ताव आया, लेकिन नोटिस के स्तर तक नहीं पहुंच पाया।