याची के अधिवक्ता अभिजीत मुखर्जी को सुन कर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि याची के दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 3 के अंर्तगत मजिस्ट्रेट को एफआईआर दर्ज कराने, विवेचना की निगरानी करने और विवेचना को किसी दूसरी जांच एजेंसी को देने का पूरा अधिकार है। पुलिस विवेचना से व्यथित याची अनुच्छेद 226 के अंतर्गत याचिका के बजाय संबंधित मजिस्ट्रेट के न्यायालय में अर्जी दाखिल कर सकता है।