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Investigation :  शुआट्स के कुलपति-कुलाधिपति की पीएचडी उपाधि को बताया जाली, एसटीएफ ने तलब किए रिकॉर्ड

Mon, 17 Jul 2023 04:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कुलपति डॉ. लाल ने 1990 में अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी से स्वॉयल साइंस में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुव्रत सिंह ने एसटीएफ के एडीजी को लिखे पत्र में कहा है कि कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट की लाइब्रेरी के रिकॉर्ड से पता चला है कि राजेंद्र बिहारी लाल के नाम से कभी भी और किसी भी विभाग में पीएचडी की कोई थीसिस जमा नहीं की गई है।
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आरबी लाल, कुलपति शुआटस। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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धर्मांतरण, फर्जी नियुक्तियों को लेकर विवादों में घिरे सैम हिग्गिन बॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) के कुलपति डॉ. राजेंद्र बिहारी लाल की पीएचडी उपाधि को जाली बताकर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया गया है। इसी विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने उनकी पीएचडी की उपाधि जाली होने का दावा करते हुए एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश से शिकायत की है। एडीजी के निर्देश पर एसटीएफ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही कुलपति और कुलाधिपति के शैक्षणिक रिकॉर्ड तलब किए गए हैं।

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कुलपति डॉ. लाल ने 1990 में अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी से स्वॉयल साइंस में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुव्रत सिंह ने एसटीएफ के एडीजी को लिखे पत्र में कहा है कि कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट की लाइब्रेरी के रिकॉर्ड से पता चला है कि राजेंद्र बिहारी लाल के नाम से कभी भी और किसी भी विभाग में पीएचडी की कोई थीसिस जमा नहीं की गई है।

इससे स्पष्ट हो जाता है कि डॉ. आरबी लाल ने कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री कभी प्राप्त नहीं की है। इतना ही नहीं, डॉ. आरबी लाल के नाम से कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी का कोई भी रिसर्च पेपर भी नहीं मिला है। जबकि, नियमों के अनुसार बिना तीन रिसर्च पेपर प्रकाशित किए पीएचडी डिग्री मिल ही नहीं सकती।

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इस मामले की जांच एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक नवेंदु कुमार ने शुरू कर दी है। उन्होंने कुलपति और कुलाधिपति के शैक्षणिक रिकॉर्ड विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कुलपति और कुलाधिपति के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड एसटीएफ को मुहैया करा दिए गए हैं।

सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुव्रत सिंह द्वारा कुलपति की पीएचडी उपाधि फर्जी बताने की शिकायत निराधार है। सुव्रत सिंह शुआट्स में सेवाकल के दौरान यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गए थे, तभी से विश्वविद्यालय से बदला लेने के लिए कुलपति एवं अन्य अधिकारियों के खिलाफ झूठे आरोप लगातार लगाते रहे हैं। सत्यता यह है कि शुआट्स के कुलपति डॉ. आरबी लाल ने 1990 में कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए से स्वॉयल साइंस में पीएचडी की है। साथ ही 1991 में पीडीएफ भी किया है। उनकी सभी डिग्रियां वैध हैं। एसटीएफ द्वारा कुलपति की डिग्री के संबंध में जो सूचना मांगी गई थी, विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई जा चुकी है। - रमाकांत दुबे, पीआरओ, शुआट्स
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