इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि असंज्ञेय अपराध में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर परिवाद चलाने की संस्तुति होने के बावजूद मजिस्ट्रेट की ओर से संज्ञान लेकर समन जारी करना कानूनन गलत है। कोर्ट ने इसे गैरकानूनी मानते हुए रद्द कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि असंज्ञेय अपराध में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर परिवाद चलाने की संस्तुति होने के बावजूद मजिस्ट्रेट की ओर से संज्ञान लेकर समन जारी करना कानूनन गलत है। कोर्ट ने इसे गैरकानूनी मानते हुए रद्द कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट को नए सिरे से विधिसम्मत आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पद्म नारायण मिश्र की एकल पीठ ने अनंत गुप्ता व तीन अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए दिया।
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आरोपी के खिलाफ गाजीपुर के मरगाह थाने में चोट पहुंचाने, शांतिभंग और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। याची का आरोप था कि विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर मामले को परिवाद के रूप में चलाने की संस्तुति की थी। इसके बावजूद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए 17 मई 2025 को आरोपियों के विरुद्ध समन जारी कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि जब पुलिस रिपोर्ट में असंज्ञेय अपराध के मामले में परिवाद चलाने की संस्तुति की जाती है तो मजिस्ट्रेट की ओर से सीधे संज्ञान लेकर समन जारी करना विधि विरुद्ध है।