कोर्ट ने कहा कि यद्यपि कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है और औपचारिक नियोक्ता–कर्मचारी संबंध समाप्त हो गए हैं, लेकिन सिविल सर्विस रेगुलेशन में सेवानिवृत्त कर्मियों पर कार्रवाई की पूर्ण प्रक्रिया उपलब्ध है। इसलिए यह दलील स्वीकार नहीं की जा सकती कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी प्रकार की जांच या कार्यवाही नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी सिर्फ वेतन अर्जित करने के लिए कार्य नहीं करते, बल्कि उनका काम राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। ऐसे में उनके ऊपर उच्चस्तर की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में सरकारी विभागों में तेजी से बढ़ रही भ्रष्ट प्रवृत्तियों, पक्षपात और सुविधा उपलब्ध कराने जैसी मनमानी को रोकने के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी जांच और कार्रवाई से बाहर नहीं रखा जा सकता। यह जनता और उसके प्रतिनिधियों का अधिकार है कि वे किसी भी सरकारी कर्मचारी चाहे सेवारत हो या सेवानिवृत्त की कार्य अवधि में हुई लापरवाही या कदाचार की जानकारी सामने ला सकें।