मो.वसीम के खिलाफ फूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज है, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी समेत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। अभियोजन के अनुसार मोहम्मद वसीम मातृ-पितृ सहयोग एग्रोटेक लिमिटेड नामक कंपनी का एजेंट था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया है। मामले में विवेचक और सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने मो.वसीम की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया।
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मो.वसीम के खिलाफ फूलपुर थाने में मुकदमा दर्ज है, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी समेत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। अभियोजन के अनुसार मोहम्मद वसीम मातृ-पितृ सहयोग एग्रोटेक लिमिटेड नामक कंपनी का एजेंट था। आरोप है कि उसने पीड़ित और उसके परिवार को कंपनी में निवेश के लिए प्रेरित किया, जिस पर छह लाख रुपये जमा कराए गए। कंपनी की ओर से रसीद और बॉन्ड भी जारी किए गए थे। बाद में कंपनी का कार्यालय बंद हो गया और उसका निदेशक फरार हो गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।
इससे पूर्व 11 फरवरी को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी थी कि धन का दुरुपयोग कंपनी स्तर पर हुआ, जबकि पुलिस ने न तो कंपनी की भूमिका की गंभीरता से जांच की और न ही उसके निदेशक की गिरफ्तारी का प्रयास किया। जिस पर कोर्ट ने कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
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कोर्ट के समक्ष अभियोजन की ओर से दायर अनुपालन हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया गया। वहीं, आवेदक पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि 16 फरवरी 2026 को कंपनी के निदेशक का नाम और पता पुलिस को उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बावजूद अब तक उसकी जांच नहीं की गई।
कोर्ट ने सोरांव के सहायक पुलिस आयुक्त की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि छह फरवरी के बाद से जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है। इस पर कोर्ट ने 27 फरवरी को सुबह 10 बजे विवेचक और एसीपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।