जिले की करछना तहसील के पंचदेवरा गांव में अधिग्रहीत की गई भूमि के मामले में काश्तकार को हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी। कोर्ट ने याचिका को निरस्त करते हुए अधिग्रहण को सही ठहराया। कहा कि भूमि अधिग्रहण लोकहित के लिए किया गया है, लिहाजा याचिका पोषणीय नहीं है। यह आदेश याची प्रभा शुक्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है।
मामले में याची ने भूमि अधिग्रहण कानून- 2013 की धारा 11 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से छह अप्रैल 2021 को जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की थी। याची का कहना था कि वह अधिग्रहीत होने वाली भूमि में अपना घर बनाने के लिए नींव रखवा चुकी है। इसलिए उसकी भूमि अधिग्रहीत कर ओवरब्रिज न बनाया जाए। अधिग्रहीत भूमि पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है।
याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अधिग्रहण के दौरान याची को एक बार भी सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। कहा कि इस अधिग्रहण से वह और उसका परिवार विस्थापित हो जाएगा। याची को पुनर्वास योजना की भी जरूरत है। सरकारी अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने कोर्ट को बताया कि भूमि लोकहित के लिए अधिग्रहीत की गई है। रेलवे अपना ओवरब्रिज बनवा रहा है। काम शुरू हो गया है। सरकारी अधिवक्ता ने रामनिकलाल व अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य केस का हवाला भी दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद याचिका को मेरिट पर न पाते हुए खारिज कर दिया।