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High Court : हाईकोर्ट ने पति पर लगाया 15 लाख का हर्जाना, कहा–विवाह शोषण का लाइसेंस नहीं

Fri, 24 Apr 2026 02:35 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया। कहा कि विवाह जैसा पवित्र रिश्ता किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं है।
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कोर्ट।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया। कहा कि विवाह जैसा पवित्र रिश्ता किसी का शोषण करने का लाइसेंस नहीं है। कोर्ट ने झूठे तथ्यों के आधार पर याचिका दाखिल करने वाले पति पर 15 लाख रुपये का हर्जाना लगाया और याचिका खारिज कर दी।

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न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने इटावा निवासी की उस याचिका को निरस्त कर दिया, जिसमें उसने परिवार न्यायालय में लंबित भरण-पोषण मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग की थी। याची ने स्वयं को बेरोजगार और आयविहीन बताते हुए दावा किया था कि उसकी पत्नी हाईकोर्ट में कार्यरत है। उसे आर्थिक सहायता दे।

पत्नी ने अदालत को बताया कि पति ने झांसा देकर उसके वेतन खाते से दो बड़े ऋण लिए थे, जिसका उपयोग शराब व अन्य व्यक्तिगत खर्चों में किया। वर्तमान में पत्नी ही उन ऋणों की मासिक किस्तें चुका रही है।
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कोर्ट ने पाया कि याची पेशे से वकील है। शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम है। कोर्ट ने यह भी माना कि उसने यह तथ्य छिपाया कि वह पहले से ही एक अन्य मामले में पत्नी से पांच हजार रुपये प्रतिमाह का अंतरिम भरण-पोषण प्राप्त कर रहा है। ब्यूरो

कोर्ट ने पति को भरण-पोषण का कानूनी हकदार नहीं मानते हुए 15 लाख रुपये छह सप्ताह में पत्नी को देने का आदेश दिया। भुगतान न करने पर इटावा के जिला मजिस्ट्रेट को उसकी संपत्ति से राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भविष्य की सुनवाई बंद कमरे में करने, पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और झूठा हलफनामा दाखिल करने पर उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश दिया गया है। 

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