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हाईकोर्ट : समझौते की प्रक्रिया अपनाए बिना गुण-दोष के आधार पर मुकदमों का निस्तारण अवैधानिक

Fri, 03 Dec 2021 10:43 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज

सार

एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) ने स्थायी लोक अदालत बस्ती के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि विपक्षी की पत्नी प्रमिला पांडेय ने हेल्थ प्लस योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि स्थायी लोक अदालतें मुकदमों का निस्तारण सीधे गुण-दोष के आधार पर नहीं कर सकती हैं। उन्हें पहले सुलह-समझौते की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। अगर स्थायी लोक अदालतें सुलह-समझौते की प्रक्रिया को अपनाए बिना मुकदमों का गुण-दोष के आधार पर निस्तारण कर देती हैं तो वह अवैधानिक है। मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने अपने हिंदी में दिए गए फैसले में यह आदेश दिया।

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एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) ने स्थायी लोक अदालत बस्ती के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि विपक्षी की पत्नी प्रमिला पांडेय ने हेल्थ प्लस योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। उसने दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में अपनी सर्जरी कराई थी। उसने याची से अस्पताल में हुए खर्च (तीन लाख, 64 हजार, 678 रुपये) का दावा किया। लेकिन एलआईसी ने विपक्षी के दावे को इस शर्त पर अस्वीकार कर दिया कि दावा बीमा नीति के अंतर्गत नहीं था, क्योंकि विपक्षी की पत्नी बीमा लेने से पहले मोटापे से ग्रसित थी।

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मामले में विपक्षी ने एलआईसी के निर्णय के खिलाफ स्थायी लोक अदालत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करते हुए खर्च हुई धनराशि तथा ब्याज की मांग की। इस पर स्थायी लोक अदालत ने 22 अक्तूबर को अपने फैसले में विपक्षी की याचिका को स्वीकार करते हुए एलआईसी को तीन लाख, 64 हजार, 678 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया, साथ ही उसे याचिका दाखिल करने की तिथि से 10 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से ब्याज देने को कहा। इसके अलावा वाद व्यय और वकील के मद में पांच हजार रुपये का भी देने का आदेश दिया था।

स्थायी लोक अदालत के इस फैसले के खिलाफ एलआईसी ने हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की थी। इस पर हाईकोर्ट ने पाया कि मामले में सुनवाई केदौरान स्थायी लोक अदालत ने सौहार्दपूर्ण समझौते के लिए युक्तियुक्त प्रयास नहीं किया और मामले का सीधे निस्तारण कर दिया। इस वजह से हाईकोर्ट ने स्थायी लोक अदालत केफैसले को निरस्त कर दिया और स्थायी लोक अदालत को निर्देश दिया कि वह समझौता कराने की प्रक्रिया अपनाकर पक्षकारों के मध्य सुलह कराने का प्रयास करे। सुलह-समझौते का प्रयास असफल होने की उपरांत ही वाद का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करे।
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