मामले में विपक्षी ने एलआईसी के निर्णय के खिलाफ स्थायी लोक अदालत के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करते हुए खर्च हुई धनराशि तथा ब्याज की मांग की। इस पर स्थायी लोक अदालत ने 22 अक्तूबर को अपने फैसले में विपक्षी की याचिका को स्वीकार करते हुए एलआईसी को तीन लाख, 64 हजार, 678 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया, साथ ही उसे याचिका दाखिल करने की तिथि से 10 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से ब्याज देने को कहा। इसके अलावा वाद व्यय और वकील के मद में पांच हजार रुपये का भी देने का आदेश दिया था।
स्थायी लोक अदालत के इस फैसले के खिलाफ एलआईसी ने हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की थी। इस पर हाईकोर्ट ने पाया कि मामले में सुनवाई केदौरान स्थायी लोक अदालत ने सौहार्दपूर्ण समझौते के लिए युक्तियुक्त प्रयास नहीं किया और मामले का सीधे निस्तारण कर दिया। इस वजह से हाईकोर्ट ने स्थायी लोक अदालत केफैसले को निरस्त कर दिया और स्थायी लोक अदालत को निर्देश दिया कि वह समझौता कराने की प्रक्रिया अपनाकर पक्षकारों के मध्य सुलह कराने का प्रयास करे। सुलह-समझौते का प्रयास असफल होने की उपरांत ही वाद का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करे।