हाईकोर्ट की पश्चिमी उत्तर प्रदेश बेंच के मसले पर अधिवक्ताओं एवं उनके समर्थन में उतर तमाम वर्ग के लोगों का क्रमिक अनशन मंगलवार को भी जारी रहा। इस बीच आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने वकीलों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित कर लिया। वकीलों का प्रतिनिधिमंडल दो जनवरी को दिल्ली में गृहमंत्री से मुलाकात करेगा। तब तक क्रमिक अनशन जारी रहेगा। वार्ता के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
मंगलवार को एक तरफ वकीलों का क्रमिक अनशन जारी रहा तो दूसरी ओर सलाहकार समिति और एक्शन कमेटी की संयुक्त बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय एवं महासचिव डॉ. सीपी उपाध्याय के अनुसार बैठक के दौरान संतोष उपाध्याय, अशोक कुमार सिंह, हरिकेश कुमार सिंह, प्रदीप कुमार सिंह सेंगर, काशीनाथ सिंह एवं अनिल कुमार श्रीवास्तव को संघर्ष समिति का सदस्य बनाया गया। क्रमिक अनशन में शामिल सदस्यों की बढ़ी हुई संख्या के मद्देनजर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को मंच का विस्तार करने के लिए अधिकृत किया गया। अवधेश श्रीवास्तव को अधिकृत किया गया कि संघर्ष समिति की एक उपस्थिति पंजिका मेंटेन करें और समिति की प्रत्येक बैठक में भाग लेने के लिए सभी सदस्यों का हस्ताक्षर लें। तय हुआ कि संघर्ष समिति की बैठक रोज दोपहर एक बजे आयोजित की जाएगी। क्रमिक अनशन में महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार मिश्र सहित डॉ. नीलमकांत, डॉ. केबी श्रीवास्तव, डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. मंजू सिंह, डॉ. मनीष, इविवि कर्मचारी संघ के सचिव ओम प्रकाश गुप्ता, पार्षद राजरूपपुर चंद्रभूषण सिंह सहित वीके शर्मा, गोकरन सिंह, अनिल तिवारी, संजीव सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, अशोक चौधरी, राम सजीवन आदि शामिल रहे।
उच्च न्यायालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को भाजपा सांसद श्यामचरण गुप्त से मुलाकात की। सांसद ने आश्वस्त किया कि उच्च न्यायालय के विभाजन न तो कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास है और न ही भाजपा के पास है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के किसी भी तरह का विभाजन उन्हें मान्य नहीं है और इस आंदोलन में वह भी वकीलों के साथ हैं। प्रतिनिधिमंडल में विकास चंद्र त्रिपाठी, श्रवण दुबे, कैलाश प्रकाश, यागेंद्र कुमार, पवन श्रीवास्तव आदि शामिल रहे। उधर, भाजपा के वरिष्ठ ने डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने एक वक्तव्य में कहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री ने हाईकोर्ट बेंच के मसले पर कोई बयान नहीं दिया। इसे लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का गौरवशाली इतिहास रहा है। इससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उधर्र हाईकोर्ट संघर्ष सलाहकार समिति के सदस्य शरद चंद्र मिश्र ने भी सभी अधिवक्ताओं से असंवैधानिक खंडपीठ का विरोध करने और विभाजन रोकने के लिए एकता को बनाए रखने का आह्वान किया है।