हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच बनाने के मुद्दे पर पिछले छह दिनों से चल रही हड़ताल खत्म कर दी है। बृहस्पतिवार को दिल्ली से लौटे प्रतिनिधि मंडल ने आमसभा में केंद्रीय कानून मंत्री सदानंद गौड़ा से हुई वार्ता की जानकारी दी। बताया कि बेंच बनाने को लेकर केंद्र सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। इस आश्वासन के बाद बार के अध्यक्ष राके श पांडेय ने हड़ताल समाप्त करके शुक्रवार को कार्य प्रारंभ करने की घोषणा की। मगर वकीलों के तबके ने इस निर्णय का विरोध करतेे हुए हड़ताल जारी रखने की घोषणा की। इसे लेकर आम सभा में देर तक हंगामा होता रहा। अध्यक्ष और मंत्री सभा छोड़कर चले गए । बाद में बार अध्यक्ष ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश से अगले तीन कार्य दिवसों पर ‘नो एडवर्स आर्डर’ का अनुरोध किया है, जो स्वीकार कर लिया गया है। फ्रेश मुकदमों में भी जो वकील उपस्थित नहीं हो पाएंगे, उनका केस अगली तिथि पर फ्रेश के तौर पर ही लगाया जाएगा।
दिल्ली से लौटे प्रतिनिधि मंडल के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव ने आम सभा को विधि मंत्री से हुई वार्ता की हूबहू जानकारी दी। विधि मंत्री ने बताया कि उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ बनाने के संबंध में कोई बयान नहीं दिया है। यह बताया कि खंडपीठ बनाने की प्रक्रिया लंबी है और उनको अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है। इस जानकारी बाद आम सभा में 19 दिसंबर से न्यायिक कार्य प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।
बार के हड़ताल खत्म करने के प्रस्ताव का तत्काल वकीलों के एक तबके ने विरोध शुरू कर दिया। यह लोग विधि मंत्री के आश्वासन से सहमत नहीं थे। वकीलों ने अध्यक्ष को फिर से बुलाने की कोशिश की पर नहीं आए। इसके बाद अध्यक्ष और मंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर उपाध्यक्ष एके ओझा को अध्यक्ष तथा अभिषेक सिंह चौहान को आम सभा का कार्यकारी मंत्री नियुक्त करते हुए हड़ताल 19 दिसंबर को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया। विरोध कर रहे वकीलों ने अपने प्रस्ताव के समर्थन में सैकड़ों अधिवक्ताओें से हस्ताक्षर भी कराया है।