इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को छह हफ्तों के लिए स्थगित कर दी गई। न्यायमूर्ति वीके बिड़ला और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यह मामला मुख्य न्यायाधीश से नामांकन प्राप्त कर उपयुक्त पीठ के समक्ष लगाया जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को छह हफ्तों के लिए स्थगित कर दी गई। न्यायमूर्ति वीके बिड़ला और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यह मामला मुख्य न्यायाधीश से नामांकन प्राप्त कर उपयुक्त पीठ के समक्ष लगाया जाए।
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पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यह मामला छह हफ्ते बाद सुना जा सकता है। तब तक न्यायाधीशों की नियुक्तियों के मामले में और प्रगति हो सकेगी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति के लिए 26 नामों की सिफारिश की है। वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी के अधिवक्ता ने दलील दी कि हाईकोर्ट में लंबित करीब 12 लाख मामलों का निपटारा गणितीय दृष्टि से असंभव है, चाहे सभी 160 स्वीकृत पद ही क्यों न भर दिए जाएं।
मौजूदा 87 न्यायाधीशों की स्थिति में तो यह और भी कठिन है। इसीलिए याचिका में मांग की गई है कि राज्य की 24 करोड़ से अधिक आबादी और बढ़ते मुकदमों के बोझ को देखते हुए हाईकोर्ट की स्वीकृत संख्या को भी काफी हद तक बढ़ाया जाए। मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका को न्यायमूर्ति बिड़ला की पीठ को सौंपा था। क्योंकि, यह उस समय की वरिष्ठतम गैर-कॉलेजियम पीठ थी। हालांकि, न्यायमूर्ति वीके बिड़ला 17 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसलिए अब यह मामला छह हफ्तों बाद मुख्य न्यायाधीश की ओर से नामित नई पीठ के समक्ष सुना जाएगा।