कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद प्रेम लाल पटेल केस का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व में राज्य सरकार ने चुनाव की तारीखें तय करने की शक्ति अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी, जिसे असांविधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया गया था। संविधान का अनुच्छेद 243क स्पष्ट करता है कि चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण केवल निर्वाचन आयोग में निहित है। सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने इस मामले में कानून की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय की मांग की है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से अगली तारीख 25 मार्च तक समय सीमा के भीतर चुनाव कराने की स्थिति स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अगली तारीख पर एडवोकेट जनरल या एडिशनल एडवोकेट जनरल को भी मौजूद रहने की बात कही है।