1977 में अधिसूचना, 1982 में तय किया गया मुआवजा
सरकार ने 1977 में अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी, मुरादाबाद ने 1982 में शुरुआती मुआवजा 15.75 प्रति वर्ग गज तय किया था। कुछ मामलों में अदालत ने 1990 में ब्याज सहित मुआवजा 64 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया। असंतुष्ट किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने धारा 28-ए, भूमि अधिग्रहण अधिनियम का सहारा लिया जो उन लोगों को राहत देती है जो शुरू में वाद नहीं लड़ पाए। इस प्रावधान के अनुसार यदि एक किसान ने मुआवजा बढ़वाने में सफलता पाई हो तो अन्य किसान भी उसी लाभ के हकदार होंगे।
हाईकोर्ट की टिप्पणियां
1.चार दशक से अधिक समय तक किसानों को उनका उचित मुआवजा नहीं मिल सका। यह स्थिति न केवल न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि राज्य के दायित्वों पर भी प्रश्न खड़ा करती है।
2.भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 28-ए को विशेष रूप से उन किसानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है जो प्रारंभिक दौर में कानूनी दावा पेश नहीं कर पाते।
3.न्याय की गाड़ी धीमी जरूर चलती है लेकिन अंततः यह सुनिश्चित होना चाहिए कि न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि होते हुए दिखाई भी दे।
कोर्ट ने जताई प्रशासन से अपेक्षा
कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अधिकारी इस आदेश का अक्षरशः और भावनाओं सहित पालन करेंगे,ताकि किसानों को अब और विलंब या उत्पीड़न न झेलना पड़े।