इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया में तिलक समारोह के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में दो लोगों की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए विनय सिंह उर्फ विनय प्रताप सिंह की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। साथ ही अपील लंबित रहने के दौरान ट्रायल कोर्ट से मिली सजा को निलंबित करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया। मामला 2006 में बलिया के हल्दी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार तिलक समारोह में कई लोग हर्ष फायरिंग कर रहे थे। इसी दौरान चली गोली से मनोज मिश्रा और चंदेश्वरी सिंह की मौत हो गई थी, जबकि राम कुमार यादव घायल हुए थे। मामले में विनय सिंह को धारा 302 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया गया था।
सीबी-सीआईडी की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
विनय की ओर से दलील दी गई कि विवेचना के दौरान सीबी-सीआईडी ने रिपोर्ट दाखिल की थी। उसके मुताबिक घटनास्थल से मिले तीन खाली कारतूस उसकी पिस्टल से चलने की बात सामने आई थी, लेकिन इससे यह साबित नहीं हुआ कि मनोज मिश्रा की मौत उसकी गोली से हुई। चंदेश्वरी सिंह के शरीर से मिली गोली भी विनय की पिस्टल अथवा डॉ. सीताराम सिंह की रिवॉल्वर से मेल नहीं खाई थी।
बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास और सुधार होने का भी हवाला दिया। यह भी कहा गया कि समारोह में हर्ष फायरिंग होने की बात प्रारंभिक आरोपियों की ओर से स्वीकार की गई थी। निचली अदालत ने सीबी-सीआईडी की निष्कर्ष रिपोर्ट पर समुचित विचार नहीं किया।
कोर्ट ने याची को व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के दो जमानती पेश करने पर रिहा करने का निर्देश दिया है। साथ ही एक महीने के भीतर जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि जमा करने को कहा है। शेष 50 प्रतिशत राशि अपील लंबित रहने तक स्थगित रहेगी। कोर्ट ने यह शर्त भी लगाई है कि जमानत अवधि में विनय सिंह न्यायालय की अनुमति के बिना अपनी अचल संपत्ति को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकेगा।