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High Court : अस्थायी अध्यापकों को नियमित करने पर सरकार जल्द लेगी निर्णय, महाधिवक्ता ने कोर्ट को दी जानकारी

Fri, 06 Sep 2024 02:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकार को सही जानकारी नहीं दी। दो मुद्दों को मिक्स कर भ्रमित कर उलझा रखा है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आदेश की प्रति मुख्यमंत्री के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने विनोद कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर दिया।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि सात अगस्त 1993 से दिसंबर 2000के बीच नियुक्त अस्थायी अध्यापकों को नियमित करने पर सरकार जल्द निर्णय लेगी। वहीं, वर्ष 2000 के बाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट के संजय सिंह केस में दिए गए फैसले के तहत फैसला लिया जाएगा।

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कोर्ट ने कहा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकार को सही जानकारी नहीं दी। दो मुद्दों को मिक्स कर भ्रमित कर उलझा रखा है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आदेश की प्रति मुख्यमंत्री के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने विनोद कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर दिया।

हाई स्कूल और इंटरमीडिएट सहायता प्राप्त कॉलेजों में सहायक शिक्षकों और व्याख्याताओं के नियमितीकरण के मामले में दाखिल याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा,शिवेंदु ओझा, वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा।
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अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट के आदेश के पालन के लिए कुछ समय मांगा। कहा कि आदेश की जानकारी सरकार को देंगे। उम्मीद है सरकार 1993से 2000तक नियुक्त एक हजार से अधिक अध्यापकों को नियमित किया जाएगा। वर्ष 2000 के बाद नियुक्त अध्यापकों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कार्यवाही की जाएगी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर अध्यापकों को वेतन देने व सेवा जारी रखने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद सरकार भुगतान रोक रखा है। कोर्ट ने कहा 7अगस्त 1993से दिसंबर 2000तक नियुक्त अध्यापकों का नियमितीकरण धारा 33जी के तहत होना चाहिए।

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