याची बोले-गरीब किसान हैं, कानून नहीं जानते
याची किसानों ने दलील दी कि वे गरीब किसान हैं। उन्हें खनन संबंधी कानून की जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने निर्धारित सीमा से अधिक मिट्टी नहीं निकाली है। अधिकारियों का सत्यापन भी उनकी जानकारी के बिना किया गया था।
सरकार बोली : याचिका पोषणीय नहीं
सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिका पोषणीय नहीं है। मंडलायुक्त के आदेश के खिलाफ याचियों के पास पुनरीक्षण का वैकल्पिक उपचार उपलब्ध है।
कोर्ट ने कहा-भरोसा रखें, सही कानूनी विकल्प अपनाएं
कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि याचियों को किसान के रूप में खेती करते हुए पाया गया। उनके परिवार को राज्य सरकार की आवासीय सहायता के लिए पात्र भी माना गया। किसानों ने यह भी कहा कि उन्हें कानून की पूरी जानकारी नहीं थी। इसी कारण उन्होंने घर बनाने के लिए जमीन समतल करने को मिट्टी निकाली। कोर्ट ने जुर्माने पर गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं देते हुए याचिका निस्तारित कर दी। कहा कि याची कानून पर भरोसा रखें। सही कानूनी विकल्प के रूप में मंडलायुक्त के आदेश के खिलाफ उन्हें पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी। वे पुनरीक्षण याचिका के साथ इस आदेश की प्रतिलिपि भी लगा सकते हैं।