इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक मामले में भी गैंगस्टर एक्ट लागू किया जा सकता है। इसके लिए अपराध का लंबा इतिहास होना अनिवार्य नहीं है। गैंगस्टर एक्ट लागू करने के लिए रूल-22 के तहत सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि के बाद आदेश जारी किया जाना पर्याप्त है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक मामले में भी गैंगस्टर एक्ट लागू किया जा सकता है। इसके लिए अपराध का लंबा इतिहास होना अनिवार्य नहीं है। गैंगस्टर एक्ट लागू करने के लिए रूल-22 के तहत सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि के बाद आदेश जारी किया जाना पर्याप्त है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने गाजियाबाद निवासी ज्योति सिंह की याचिका पर दिया है।
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याची ने गैंगस्टर के तहत दर्ज केस, चार्जशीट और संज्ञान आदेश रद्द करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि गैंगचार्ट में केवल एक ही मामला दर्शाया गया है और उसमें भी जमानत मिल चुकी है। राज्य सरकार ने बताया कि गैंगचार्ट संयुक्त बैठक में तैयार कर 21 सितंबर 2024 को पुलिस कमिश्नर ने मंजूर किया था। आधार मामले की जांच 20 सितंबर को पूरी हो चुकी थी। कोर्ट ने माना कि नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। इसी के साथ याचिका खारिज कर दी।