यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया ने वेद प्रकाश पांडेय की याचिका पर पारित किया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश की प्रति तहसीलदार को एक सप्ताह के अंदर भेजकर सूचित करें।
नायब तहसीलदार मांडा और तहसील मेजा द्वारा बीस वर्ष से लंबित रेस्टोरेशन की अर्जी को तय न कर पाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। कोर्ट ने तहसीलदार से कहा है कि लंबित रेस्टोरेशन की अर्जी को कानून के मुताबिक हर हाल में एक माह के भीतर निस्तारित किया जाए। यही नहीं, कोर्ट ने तहसीलदार के यहां लंबित दाखिल खारिज वाद को, जो वर्ष 1999 से लंबित है, उसे भी शीघ्रातिशीघ्र तीन माह के भीतर तय करने को कहा है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया ने वेद प्रकाश पांडेय की याचिका पर पारित किया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश की प्रति तहसीलदार को एक सप्ताह के अंदर भेजकर सूचित करें। याचिका दाखिल कर कहा गया था कि ट्रस्ट की संपत्ति जो वर्ष 1960 में पंजीकृत थी। उसे बगैर ट्रस्ट की जानकारी के रामसुख ने खरीद ली और खतौनी में नाम भी दाखिल खारिज करा लिया। इसको लेकर आपस में विवाद तहसीलदार के यहां लंबित है, जिसका निस्तारण नहीं किया जा रहा है।