क्या था मामला
मामला मैनपुरी के एलाऊ थान क्षेत्र का है। वर्ष 2000 में याची समेत अन्य सह आरोपियों के खिलाफ डकैती के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप लगा कि 10-15 बदमाशों के साथ मिलकर याची ने शिकायतकर्ता के घर में डकैती और गोलीबारी की। इसमें तीन लोग घायल हुए। फरवरी 2002 में मैनपुरी की जिला अदालत के विशेष न्यायाधीश (डीएए)/अपर सत्र न्यायाधीश ने आजाद खान को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दंडादेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
आरोपी की कानूनी मदद न मिलना दुखद
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान वकील की सहायता लेने में असक्षम आरोपी को राज्य की ओर से भी विधिक सहायता न देना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का घोर उल्लंघन है। यही नहीं, दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भी आरोपी को विधिक सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है, फिर भी याची कानूनी मदद न मिलना बेहद दुखद है।