फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : तलाकशुदा व स्थायी भरण पोषण स्वीकार न करने वाली पत्नी को है गुजारा भत्ता पाने का अधिकार

Tue, 22 Feb 2022 10:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट में याची (पति) की दलील थी  कि एक तलाकशुदा पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती है और उसे फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी भरण-पोषण दिए जाने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
Allahabad High Court
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट ने कहा कि तलाकशुदा और स्थायी भरण पोषण को स्वीकार न करने वाली पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है। भले ही फैमिली कोर्ट द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत स्थायी भरण पोषण देने का आदेश पारित किया गया हो। यह आदेश जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी ने गौतम बुद्ध नगर के याची की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

विज्ञापन




कोर्ट में याची (पति) की दलील थी  कि एक तलाकशुदा पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता का दावा नहीं कर सकती है और उसे फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी भरण-पोषण दिए जाने का आदेश दिया है। इसलिए सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कोई भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता है, लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को नहीं माना।



हाईकोर्ट ने कहा कि उक्त तलाक की डिक्री के खिलाफ  एक अपील न्यायालय के समक्ष लंबित है और उस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने माना कि तलाक की डिक्री के बावजूद पत्नी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग कर सकती है।

विज्ञापन
Trending Videos

पत्नी ने तलाक के आदेश को दे रखी है चुनौती
हाईकोर्ट इस मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित निर्णय और आदेश के खिलाफ  पति द्वारा दायर एक पुनरीक्षण संशोधन याचिका पर विचार कर रहा था। जिसमें फैमिली कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति को निर्देश दिया था कि वह अपनी पत्नी को हर माह 25000 रुपये भरण-पोषण के तौर पर प्रदान करे।



इससे पहले फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत पति के पक्ष में तलाक का आदेश पारित करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी भरण-पोषण के रूप में 25 लाख रुपये देने का निर्देश दिया था। हालांकि पत्नी ने तलाक के आदेश को चुनौती दे रखी है।
विज्ञापन

भरण पोषण की राशि स्वीकार करना तलाक की स्वीकृति के बराबर

प्रतिवादी (पत्नी) के अधिवक्ता ने कहा कि उसने स्थायी भरण-पोषण की राशि स्वीकार नहीं की है और याची अदालत में झूठ बोल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी भरण-पोषण की राशि को स्वीकार करना तलाक की डिक्री की स्वीकृति के बराबर होगा।



यह भी तर्क दिया गया कि प्रतिवादी ने स्थायी भरण-पोषण का दावा करने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत कभी भी कोई आवेदन दायर नहीं किया है और अदालत ने अपनी इच्छा से यह राशि प्रदान की है।



कोर्ट ने रजनीश बनाम नेहा मामले का उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक मामलों में भरण-पोषण के भुगतान पर दिशा निर्देश जारी किया है और यह माना है कि एक पत्नी विभिन्न क़ानूनों के तहत भरण-पोषण के लिए दावा कर सकती है। कोर्ट ने रोहताश सिंह बनाम रामेन्द्री के मामले का भी हवाला दिया।



कहा कि यह स्पष्ट है कि पत्नी ने निर्वाह धन, स्थायी भरण-पोषण की राशि को स्वीकार नहीं किया है क्योंकि उसने अपील में तलाक की डिक्री को चुनौती दी है। जो अभी लंबित है और निचली अदालत ने जो आदेश पारित किया है वह दुर्बलता या अवैधता से ग्रस्त नहीं है। कोर्ट ने आपराधिक संशोधन याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें