Allahabad High Court : उत्तर प्रदेश में रोक के बावजूद बुलडोजर एक्शन पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि रोक के बावजूद बुलडोजर की कार्रवाई जारी है। क्या यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि क्या 2025 में रोक के बावजूद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रखना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना नहीं है। क्या यह कार्यपालिका का अपनी मंशा छिपाकर शक्तियों का प्रयोग करने का उदाहरण नहीं है। यह टिप्पणी हमीरपुर निवासी फैमुद्दीन व दो अन्य की याचिका पर की।
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फैमुद्दीन के परिवार के आफान खान के खिलाफ सुमेरपुर थाने में 16 जनवरी 2026 को आईटी एक्ट, पॉक्सो व धर्मांतरण निरोधक कानून के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि घटना के बाद भीड़ ने याची फैमुद्दीन के घर को निशाना बनाया, जबकि ये आरोपी नहीं हैं। इसके बाद भी इनको नोटिस दिया गया। साथ ही लॉज और मिल को सील कर दिया गया। ऐसे में याची ने आशंका जताई है कि इनकी संपत्तियों को बुलडोजर से गिराया जा सकता है। इसे लेकर इन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि याचिका अभी अपरिपक्व है। आवास और लॉज सील नहीं किए गए हैं। मिल से प्रतिबंधित लकड़ी बरामद होने का तथ्य याचियों ने छिपाया है। भरोसा दिलाया कि कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई का अवसर देने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।