अब्दुल्ला आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इमरानउल्ला की ओर से तर्क दिया गया कि जब घटना हुई थी तो अब्दुल्ला आजम किशोर था। ट्रायल कोर्ट की ओर से उसे अवैध रूप से दोषी ठहराया है। इसलिए सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि आवेदक पूरी तरह से गैर मौजूद आधारों पर अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। याची पर 46 आपराधिक मामले लंबित हैं। राजनीति में पवित्रता रखना अब समय की मांग है। जन प्रतिनिधियों को स्वच्छ छवि का होना चाहिए। उक्त परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इंकार करना गलत नहीं होगा।