इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ते बंदरों के आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित विभागों को विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ते बंदरों के आतंक से लोगों को राहत दिलाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित विभागों को विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि पूर्व में दिए गए आदेश के अनुरूप ठोस कार्ययोजना पेश की जाए। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने गाजियाबाद निवासी विनीत शर्मा और प्रजक्ता सिंघल की जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए दिया।
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कोर्ट ने तीन दिसंबर 2025 के आदेश का हवाला देते हुए एक्शन प्लान दाखिल करने के लिए समय दिया है। अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को अवगत कराया कि इस संबंध में आठ जनवरी 2026 को एक बैठक हुई थी, जिसके मिनट्स कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बंदरों के आतंक को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की है। साथ ही एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने भी इस समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित एक्शन प्लान तैयार किया है, जिस पर पर्यावरण विभाग विचार कर सकता है। सरकार की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता ने कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए एक माह का समय मांगा है।