याचिका में कहा गया है की 24 फरवरी 2021 को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने कुल 9534 रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। इन पदों में 9027 दरोगा सिविल पुलिस, 484 प्लाटून कमांडर पीएसी एवं 23 अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के पद शामिल हैं।
जारी विज्ञापन के अनुसार चयन में ऑनलाइन लिखित परीक्षा, अभिलेखों की समीक्षा एवं शारीरिक मानक परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा का प्रावधान था। ऑनलाइन लिखित परीक्षा 12 नवंबर 2021 से दो दिसंबर 2021 तक तीन चरणों में उत्तर प्रदेश के 13 जनपदों में कुल 92 परीक्षा केंद्रों पर तीन पालियों में आयोजित की गई थी। कोर्ट को बताया गया कि सभी याची ऑनलाइन लिखित परीक्षा में पास होने के बाद शारीरिक मानक परीक्षा में पास हो गए थे।
सभी याची अगले टेस्ट पीटी में सम्मिलित होने के लिए मई 2022 में भर्ती केंद्र पर उपस्थित हुए। परंतु वहां पर उनका साक्षात्कार लिया जाने लगा। पूछा गया कि उन्हें लिखित परीक्षा में ज्यादा अंक कैसे मिले और कम समय में उन्होंने 160 प्रश्न कैसे हल कर लिए? आरोप है की भर्ती केंद्र पर याची गणों के साथ गाली गलौज कर उन्हें धमकाया गया और बाद में उनके खिलाफ उसी दिन विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज दिया गया।
जमानत पर छूटने के बाद याची अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है तथा उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल कर आगे चयन की कार्यवाही पूरी करने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने याचिका को विचारणीय मानते हुए सभी विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और याचिका पर सुनवाई के लिए छह सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।