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High Court : विभाग की देरी से कर्मी को उसके कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते

Fri, 13 Feb 2026 04:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय देरी के चलते किसी कर्मचारी को उसके कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय देरी के चलते किसी कर्मचारी को उसके कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि कोई नियमानुसार नियमितीकरण का पात्र है तो विभाग की ओर से प्रक्रिया में की गई देरी उसकी वरिष्ठता और पेंशन जैसे मौलिक लाभों को प्रभावित नहीं कर सकते। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी.चौहान की एकल पीठ ने राम सक्सेना की याचिका पर दिया है।

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याची नगर निगम प्रयागराज में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी वास्तविक पात्रता 10 अप्रैल 2003 के बजाय 2015 में नियमित की गई थी। याची ने इसके विरुद्ध याचिका दायर की। याची के अधिवक्ता राम कुमार सिन्हा ने दलील दी कि उप्र पालिका (केंद्रीयित) सेवा (21 संशोाधन) नियमावली, 2003 के नियम 21-क(1) के अंतर्गत नियमितीकरण के लिए याची 10 अप्रैल 2003 को पात्र था। विभागीय प्रक्रिया में देरी से उसे तीन नवंबर 2015 में नियमित किया गया।

इस देरी के लिए विभाग जिम्मेदार याची नहीं। याची को 10 अप्रैल 2003 को नियमित मानते हुए पुरानी पेंशन आदि का लाभ दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि याची को पूर्वगामी तिथि 10 अप्रैल 2003 से ही नियमित मानने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने ‘चंद्र मोहन यादव’ केस डबल बेंच में पारित आदेश का हवाला देते हुए याची की वरिष्ठता सूची को नए सिरे से तैयार करने और वित्तीय लाभों को छोड़कर अन्य सभी सेवा लाभ प्रदान करने का आदेश दिया गया है।

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