इलाहाबाद हाईकोर्ट में नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग में एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को आरक्षण देने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर संबंधित प्राधिकारी से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 26 मई 2026 तय की है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा व न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने जौनपुर निवासी सक्षम श्रीवास्तव की याचिका पर दिया है। याची ने नीट-2026 काउंसलिंग ब्रोशर में संशोधन कर एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को एक प्रतिशत आरक्षण देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याची अधिवक्ता प्रणब कुमार गांगुली ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने रद्द हो चुकी नीट-यूजी 2026 परीक्षा दी थी और वह एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारक हैं। उन्होंने कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी की यूजीसीईटी-2026 प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि वहां ऐसे अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में एक प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। साथ ही तेलंगाना के एमबीबीएस पाठ्यक्रम में भी एनसीसी अभ्यर्थियों को लाभ देने का प्रावधान है। ऐसे में याची को भी एनसीसी बी सर्टिफिकेट का लाभ दिया जाए।
वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश में केवल एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट धारकों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि ‘सी’ सर्टिफिकेट स्नातक स्तर पर मिलता है, जबकि नीट परीक्षा स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आयोजित होती है, इसलिए ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को भी लाभ मिलना चाहिए।